विश्वजीत सैनी की कविताएं।
यह ब्लाग मेरी हस्तलिखित कविताऔ के लिए समर्पित है।
सोमवार, मार्च 02, 2026
🌧️ घनघोर घटा 🌧️
घनघोर घटा छाई charon or
अंबर ne jaise ओढ़ी श्याम ,
सावन बोला मन की भाषा,
तन-मन डूबा प्रेम समंदर।
पंछी गाकर संदेशा लाए,
भीगी हवाएँ नाम दोहराएँ,
हर इक बूँद तड़प सुना दे,
दिल क्यों अपना चैन न पाए।
आँखों में सपनों का सावन,
हृदय सुलगता विरह की अगन,
तेरी झलक से खिल उठ जाएँ,
सूने पथ के मुरझाए वन।
आओ प्रिय, इस रिमझिम फुहार,
छू लो मन का नन्हा संसार,
तेरे बिना सब सूना-सूना,
तेरे संग जीवन हो त्यौहार।
मंगलवार, फ़रवरी 06, 2024
स्वच्छ भारत
वायू प्रदूषित जल दूषित
लगा है कूड़ो का अम्बार
जिसके है हम सब जिम्मेदार
फिर क्या करे अकेली भारत सरकार
शुक्रवार, जून 10, 2022
जिंदगी
संघर्ष ही जिंदगी है।
जिंदगी भर का संघर्ष है।
कठनाईयों भारी है जिंदगी
जिंदगी भर है कठनाइयाँ ।
जिंदगी जीयो होंसले से
होंसला रखो जिंदगी भर।
मुस्कारो तो खिलखिला देगी जिंदगी
खिलखलाओ तो मुस्करा देगी जिंदगी।
मेहनत कर मेहनत का रंग दिखला देगी जिंदगी
ना मान हार मेहनत से जितना सिखला देगी जिंदगी।
सुख-दुख है दो पहलू जिंदगी के
बिना सुख-दुख कुछ मज़ा नहीं है जिंदगी में।
अभी तो कुछ ही जान पाया हूं तुझे जिंदगी
देखता है आगे क्या सिखलाएगी जिंदगी।
बुधवार, फ़रवरी 24, 2016
बढ़ेगा फिर हरियाणा की माटी का अभिमान
मिटा के दिला में द्वेष बना के भाईचारा
हिंसा और जात पात पर ना फैलाओ अशांति
भुला के हिंसा के दिन का इतिहास
शान्ति का तुम करो प्रयास
ये जात पात की राजनीती करने वाले नेताओं का ना बनो शिकार
दिखा के 36 बिरादरी की एकता विफल करो इनका प्रयास
दुसरो की भड़काऊ बातें ना सुनकर लो अपनी सूझ बुझ से काम
उठाओ शांति का कदम करो ऐसे प्रयासों को नाकाम
इस से मिटेगा द्वेष, बनेगा भाईचारा,
होगी हमारी अनोखी शान।
बढ़ेगा फिर हरियाणा की माटी का अभिमान
गुरुवार, दिसंबर 31, 2015
देखो यारों ! चला एक और साल।
समाप्ति की ओर चला एक और साल,
365 दिनों का लिख चला एक और इतिहास।
कुछ गलतियों से सिखाकर कुछ खुशियाँ दिला कर ,
बंधाये नयी आशाओं की आस,
देखो यारों ! चला एक और साल।
दे चला मीठी यादें, ताकि रखे हम संजोकर।
कड़वी यादों के लिए बोल चला 'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेय'।
चलना ही है प्रकृति का नियम, चलना ही जिंदिगी है, रहना तुम सब खुशहाल।
ये कह अवविदा कर चला ये साल।
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