सोमवार, मार्च 02, 2026

🌧️ घनघोर घटा 🌧️

घनघोर घटा छाई charon or अंबर ne jaise ओढ़ी श्याम , सावन बोला मन की भाषा, तन-मन डूबा प्रेम समंदर। पंछी गाकर संदेशा लाए, भीगी हवाएँ नाम दोहराएँ, हर इक बूँद तड़प सुना दे, दिल क्यों अपना चैन न पाए। आँखों में सपनों का सावन, हृदय सुलगता विरह की अगन, तेरी झलक से खिल उठ जाएँ, सूने पथ के मुरझाए वन। आओ प्रिय, इस रिमझिम फुहार, छू लो मन का नन्हा संसार, तेरे बिना सब सूना-सूना, तेरे संग जीवन हो त्यौहार।